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Shivangi Dixit

Tragedy

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Shivangi Dixit

Tragedy

ऊपर वाला बहुत रोता होगा

ऊपर वाला बहुत रोता होगा

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टूटे पहाड़ टूट रहे हैं बांध

टूट पड़ा केदारनाथ पर हिमनद एक विशाल 

भड़क रही विदेशों के वन में ज्वाला अग्नि की 

सांस न ले पाती ठंड में ऐसी हालत दिल्ली की 

अपनी सृष्टि की हालत देख उसका दिल भी कचोटता होगा 

ऊपरवाला बहुत रोता होगा।

  

ना रहा अपनों का प्यार ना रहा दुनिया पर विश्वास 

ना रखती मां अपने बच्चों से आस

हो रही लड़ाई भाई की भाई से दौलत शोहरत की 

ना बच पा रही आबरू एक बेटी की 

महाभारत से भी गंभीर लड़ाई होगी अब इंसानों की 

ना आपाएगा कृष्ण बचाने इज्जत द्रौपदी की 


इस बात पर ऊपर वाला अफसोस जताता होगा 

ऊपर वाला बहुत रोता होगा।

कट रहे हैं वन बन रहे हैं महल 

कर रही मनुष्य जाति विनाश की ओर पहल


विनाश काले विपरीत बुद्धि होती मनुष्य जाति की 

बेजुबान जानवर पर देखी हैवानियत इंसानों की 

नाश हो रहा देख अपनी रचना का क्रोध भर आता होगा

ऊपर वाला बहुत रोता होगा। 

     


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