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Manoj Kumar

Romance Others

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Manoj Kumar

Romance Others

उस शाम की बात, प्रेमिका के साथ

उस शाम की बात, प्रेमिका के साथ

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अब वो शाम फिर कभी नहीं आएगी।

जो मिली थी सनम।।

गुलमोहर तले।

खुश हो गई थी तमन्नाएं मेरी।।

देखकर तुमको हुई आंखें नरम।

दिल ही दिल में होने लगी खलबली।।

कैसे तुमसे बातें करें।

देखकर सुरमई आंखें, कैसे आहें भरे।।

चटकीली नजरें मेरी।

कैसे तुम पर उतारूं।।

अब गुदगुदी उस शाम की, कभी नहीं हंसाएगी।

अब वो शाम फिर कभी नहीं आएगी।।


कोहरे के बूंदों के घेरे में थे।

ठंडक थी ऐसी की दोनों ठिठुरते थे।।

मस्ती थी ऐसी की ठंडक भी भूले।

मस्ती में जो बातें करते थे।।

खोकर आगोश में निगाहें मिलती थी।

संवारते चले प्यार अपने,

सांसों से दोनों फुसफुसाते थे।।

अपने जोश में हम खोकर।

तुमसे नजदीक होकर।।

तुम्हारे ही जोश में सिमटते गए।

अब वो जोश भरी आंधी नहीं आएगी।

अब वो शाम फिर कभी नहीं आएगी।।


तुम्हारी मासूम अदा थी ऐसी।

हम खुद ही भूल गए वापस जाने को।।

वो शाम भी बुनती थी इश्क की लड़ी।

हम दोनों को उलझ जाने को।।

फिर भी हम निकल नहीं पाए, तुम्हारी अदा से।

वो शाम मस्तानी थी।।

मेरी निगाहें बार- बार देखती थी।

तुम्हें एकटक होकर।।

कि तुमसे प्यार करूं।

यही बातें दिल की धड़कने कहती थी।।

अब वो दिल की आवाजें नहीं आएगी।

अब वो शाम फिर कभी नहीं आएगी।।


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