तूफ़ान
तूफ़ान
अँखियों के ट्विंकल के सांकल खोलकर
पुराने सब गम को गन के बम से उड़ाकर
धांये ! धम ! की धमाचौकड़ी के धमाकों से धूम मचाकर
झूठ-जटिल , इतना -कितना सब है मिटना ,
दौड़कर ,सरपट सब लपट -झपट कर ,
हर्षोल्लास के आनंद की चुल्ल चढ़ाकर
बारिश भरे बादलों की थाने में चोरी -चकारी की रपट लिखाकर
कभी नाक सी सीध में ,कभी भूलभूलैया में भटककर
हंसी ठिठोली की जमात में सुकून की बिसात बिछाकर
टूटी फूटी ऊबड़-खाबड़ फर्श पर बारिश के रिस्क में रंगी
उम्मीद की किरणों से इंद्रधनुष की रंगोली सजाकर
दिसंबर की कड़कड़ाती सर्दी के तूफ़ान को
धूप की नरमाई का हार पहनाकर
दुनिया को जीतना सिखा दे।
