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Sonam Kewat

Tragedy Fantasy Thriller

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Sonam Kewat

Tragedy Fantasy Thriller

तुम्हें चाहने के बाद

तुम्हें चाहने के बाद

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तुम्हें चाहने के बाद किसी और को चाहने का मन नहीं करता।

तुम कहते हो कि नहीं चाहते मुझे, पर ऐसा मेरा मन नहीं कहता।

मेरी चाहत में कोई तोल-मोल नहीं है,

तुम्हें बता दूँ सारी बातें पर मेरे पास वैसे बोल नहीं है।

टटोलती रही हाले-दिल हजारों दफा,

पर हर बार इस चाहत की चाह रही बस एक-तरफा।

जब सोचती हूँ कभी कि अगर चाहत ये दो-तरफा होती,

तो मानो मिल जाता सागर को जैसे कोई मोती।

पर हर चाह को मुकाम मिले ऐसा जरूरी तो नहीं,

क्योंकि ना चाहने वाले के लिए ये कोई मजबूरी तो नहीं।

पर फिर भी जाने क्यों मन में आस लगी रहती है,

तू भी चाहता होगा ये मेरे भीतर की आवाज कहती है।

कभी-कभी ये आवाज बहुत शोर करती है,

फिर ये शोर दिल पर बेकाबू होकर जोर करती है।

और चलता नहीं बस जब खुद पर अपना कोई पैंतरा आजमाने से,

फिर चली आती हूँ तेरे पास होकर दूर जमाने से।

फिर हर बार की तरह वही दुत्कार मिलता है,

क्या एक बात को सौ बार दोहराने से प्यार मिलता है?

जवाब पता है पर फिर भी चाहत मन से निकलती नहीं है,

और ये भी सच है कि हर चाहने वाले को मं

जिल मिलती नहीं है।


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