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Sonam Kewat

Romance Tragedy

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Sonam Kewat

Romance Tragedy

कितना अच्छा होता

कितना अच्छा होता

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कितना अच्छा होता


कितना अच्छा होता तुम होते मैं होती,

थोड़ी बातें होती,

बातों के बाद मुलाकातें होती,

मुलाकातों के बाद वही होता,

जो तुम सोचते और मैं कहती,

या मैं वो कहती जो तुम सोचते।

कितना अच्छा लगता है सोचने में भी,

जैसे किसी फिल्मी कहानी की तरह,

या किसी रब की जुबानी की तरह।


पर फिर लगता है ये तो सिर्फ ख्वाबों में है,

हकीकत में आने के बाद लगता है,

ना तुम हो ना मैं हूँ,

ना ख्वाब है ना कहानी है ना जुबानी है,

बस एक जिंदगी है 

जो बस बितानी है।


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