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Sonam Kewat

Romance Tragedy Classics

4  

Sonam Kewat

Romance Tragedy Classics

हमें अधिकार नहीं

हमें अधिकार नहीं

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तुम कभी मेरे इतने करीब थे ही नहीं,

कि मुझे तुमसे दूर जाना पड़े।


तुम्हारे साथ इतनी यादें बनी ही नहीं,

कि मुझे तुम्हें भुलाना पड़े।


तुमने मुझे वो हक भी नहीं दिया,

कि मैं तुम्हें बुलाऊँ।


और मुझे ये हक भी नहीं,

कि तुम बुलाओ और मैं तुम्हारे पास आऊँ।


तो आखिर हमारे बीच है ही क्या?


ना प्रेम का भाव,

ना नफरत का अभाव,

बस सबकुछ शून्य है।


हम अनजान हैं,

हम अजनबी हैं।


इतने अजनबी,

कि हमें अधिकार नहीं,

कि हम एक-दूसरे को याद करें,

या फिर हम एक-दूसरे से मिलने की फरियाद करें।



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