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Sonam Kewat

Classics Fantasy Thriller

4  

Sonam Kewat

Classics Fantasy Thriller

काश

काश

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काश ये ख्वाब हकीकत होता तो कितना अच्छा होता,

काश तू मेरा होता तो कितना अच्छा होता,

काश तेरा भी हाल मेरे जैसा होता तो कितना अच्छा होता,

काश तू भी मिलने को बेताब होता तो कितना अच्छा होता,

काश मिलने के बहाने ही प्यार होता तो कितना अच्छा होता,

काश प्यार होने के बाद इजहार होता तो कितना अच्छा होता,

कभी-कभी अच्छा लगता है जब ये काश ख्वाबों को हकीकत बताने लगता है,

पर फिर दिल दुख जाता है जब ये काश अपनी औकात दिखाने लगता है,

अब मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं हैं उन ख्यालों में जिनमें काश रहता है,

पर हकीकत में ये काश ही है जो मेरे पास रहता है।


इसीलिए मैं नहीं सोचती कि काश ऐसा होता या काश वैसा होता,

मैं चाहती हूँ कोई हटा दे ये काश,

फिर बन जाता वो मेरा खास,

वो रहता मेरे आस-पास,

और फिर इन ख्वाबों को मारकर 

काश के ख्वाबों का बना देता लाश,

फिर मैं कर पाती हकीकत पर विश्वास,

और बस फिर रह जाता ये काश,

और रह जाता केवल ये काश....



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