जाने दो
जाने दो
जाने दो,
जो जा रहा है, उसे जाने दो,
ना रोको उसे, ना आवाज दो,
जिसने ठान ली है दूर जाने की,
उसे ना ही कोई सौगात दो।
ना उसका इंतजार करना है,
ना उसकी राह में खड़े रहना है,
जो मुड़ कर भी ना देखे तुम्हें,
उसके लिए ना आँसू बहाना है।
ना उससे प्यार करना है,
ना उससे नफरत करनी है,
ना उससे शिकायत करनी है,
ना उससे कोई गिला करना है,
ना उससे उम्मीद रखनी है,
ना उसके लौटने की दुआ करनी है,
ना उससे उम्मीद रखनी है,
ना उसके लौटने की दुआ करनी है,
बस इतना याद रखना है,
जो जाए उसे जाने देना है,
ना पकड़ना है, ना रोकना है,
बस चुप-चाप मुस्कुराके
कहना है —
जाने दो...

