नया रूप
नया रूप
वैसे तो मैं थोड़ा सख्त मिजाज सा हूँ,
पर तेरा सिर्फ ख्याल भी मुझे भटकाता है,
तुझे बताया नहीं कभी पर हाँ,
तेरी ही तरह मुझे भी तेरा ख्याल आता है,
बस यूँ ख्यालों में ढेर सारी बातें होती हैं,
बातों ही बातों में बस मुलाकात होती हैं,
तुझे कितने करीब से देखता हूँ कि,
तुझमें ही खुद को तलाशने लगता हूँ,
खुद की तलाश करते करते मैं भटकने लगता हूँ,
हाँ भटकाती है तू मुझे जब भी तू करीब आती है,
तेरी निगाहें भी मुझे बहुत बेचैन कर जाती हैं,
और वो बेचैनी ऐसी कि बस मैं मदहोश हो जाता हूँ,
तू थोड़ी सी खोती है पर मैं पूरा ही तेरा हो जाता हूँ,
तेरे जिस्म का स्पर्श भी मुझे तेरी रूह तक ले जाता है,
फिर उस पल में पता नहीं मुझे क्या हो जाता है,
हो जाता हूँ मैं थोड़ा आशिक, पागल और थोड़ा आवारा,
बस मिलना चाहता हूँ ऐसा कि बिछड़ ना पाऊँ दोबारा,
और फिर समझ आता है कि मेरा सख्त सा मिजाज भी तेरे साथ पिघल जाता है,
बस कुछ इस तरह तेरे साथ मेरा एक नया रूप निकल कर आता है।

