STORYMIRROR

मधुशिल्पी Shilpi Saxena

Romance

4  

मधुशिल्पी Shilpi Saxena

Romance

तुम्हारे इश़्क मे...!

तुम्हारे इश़्क मे...!

1 min
76

तुम्हारे इश्क़ में कुछ इस तरह बीमार मैं रहती हूँ

तुम्हारे नाम की गोली सुबह और शाम लेती हूँ


तड़पती हूँ , सिसकती हूँ, कभी बेचैन होती हूँ

कभी करवट बदलती हूँ, कभी तारे मैं गिनती हूँ


तुम्हारे इश्क़ मे कुछ इस तरह बीमार मैं रहती हूँ

तुम्हारे नाम की गोली सुबह और शाम लेती हूँ


सँवरती हूँ, लरज़ती हूँ, महकती हूँ, बहकती हूँ

फ़ना हो-होके, तुम पर ही निगाहें चार रखती हूँ


तुम्हारे इश्क़ मे कुछ इस तरह बीमार मैं रहती हूँ

तुम्हारे नाम की गोली सुबह और शाम लेती हूँ


कलम हाथों मे लेकर मैं तुम्हारा नाम लिखती हूँ

कोरेकाग़ज़ पर अक्सर ही तुम्हें सलाम मैं लिखती हूँ


तुम्हारे इश्क़ में कुछ इस तरह बीमार मैं रहती हूँ

तुम्हारे नाम की गोली सुबह और शाम लेती हूँ


तुम्हारे इश्क़ में कुछ इस तरह बीमार मैं रहती हूँ

तुम्हारे नाम की गोली सुबह और शाम लेती हूँ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance