Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

तुम हो -२

तुम हो -२

1 min 340 1 min 340

अनदेखे ख्वाबों में तुम हो 

भीगे एहसासों में तुम हो 

अनसुनी मेरी सभी,

फरियादों में तुम हो 

कभी जो न माँगी रब से 

मेरी उन दुआओं में तुम हो।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Anand Kumar

Similar hindi poem from Romance