STORYMIRROR

मिथलेश सिंह मिलिंद

Tragedy

4  

मिथलेश सिंह मिलिंद

Tragedy

तीर-तुक्का

तीर-तुक्का

1 min
291

विधा - प्रदीप छंद

विधान - १६/१३ पर यति, चरणांत लघु गुरु, चार चरण दो-दो या चारो चरण समतुकांत

बदली जग की कार्य प्रणाली, बदला हर इंसान है।

बहरा  आतुर  सुनने बैठा , सुनने में  बेजान है।।

गूंगा मन ही मन चिल्लाता, जिह्वा खुद अनजान है।

आँखों वाला आँख चुराता , अंधा पथिक प्रधान है।। 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy