थोड़ी सी छाँव रहने दीजिये
थोड़ी सी छाँव रहने दीजिये
ना भौतिकता के बंधन में बांधिये,
इन गाँव को गाँव ही रहने दीजिए !
मत काटो इन बेजुबान जंगलों को,
थोड़ी सी तो ठंडी छाँव रहने दीजिए !
इन्हें मत फँसाओ शहरी शोखी में,
जमीं पर इनके पाँव रहने दीजिए !
कश्तियाँ कभी बालू पर नहीं चलती,
कभी कभी नदी में नाव रहने दीजिए !
आधुनिक ताब आबोहवा से बचाओ,
थोड़ी मनोहर सी ठांव रहने दीजिए !
तरीके ना आज़माओ गाँववालों पर,
शेष कुछ इनके तो दांव रहने दीजिए !
मत पहनाओ नूरानी जामा इन्हें,
कुछ पुरानी आब रहने दीजिए।
मत बिगाड़ो शक़्ल मेरे गाँव की,
बस गाँव को गाँव रहने दीजिए।
