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S Ram Verma

Romance


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S Ram Verma

Romance


तेरी याद

तेरी याद

1 min 147 1 min 147

वो आकर मेरे दर पर आवाज़ देती है और चली जाती है

फिर तेरी याद भी आती है और आकर चली जाती है


मेरी आँखों से आँखें मिलते ही उसकी ऑंखें नम हो जाती है

फिर वो मुझसे अपनी नज़रों को चुराती है और चली जाती है 


ज़िन्दगी की भाग दौड़ मेरे बने बनाये बाल बिगाड़ती है

फिर वो मेरे बाल बनाती है और चुपचाप चली जाती है


मुझे चिढ़ाने के ख़ातिर चाँद के साथ अठखेलियाँ करती है

और चांदनी मेरा दर्द बढ़ाती है और फिर चली जाती है 


ये मोहब्बत भी कितनी अजीब चीज़ है " प्रखर " ,

मेरी शाम के चंद लम्हों को सजाती है और चली जाती है !


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