तेरे बदन पे लहराऊँ
तेरे बदन पे लहराऊँ
रात की शुरुआत मैं देख रहा हूं,
तेरा इंतजार मैं कर रहा हूं,
चांद तारे तेरे आंचल में बांधकर,
तेरे बदन पर मैं लहराऊँ।...
तेरे मिलन के लिये तड़प रहा हूं,
इश्क का प्यासा मैं बन गया हूं,
तू आये तो दिल का मैखाना खोलूँ,
ज़ाम की नदियाँ मैं बहाऊँ।
महकती फ़िज़ा में तुझ को बुलाऊँ,
तेरे इश्क का इस्तकबाल मैं करुं,
चांद तारे तेरे आंचल में बांधकर,
तेरे बदन पर मैं लहराऊँ। ...
तू आये तो मैं महेफ़िल सजाऊँ",
रुमझुम रुमझुम तेरे संग नाचूं,
शेर और शायरी की धूम मचाऊँ,
तेरे हुस्न में मदहोश बन जाऊं।
अब न तड़पा तू, मैं बहुत तरसा हूं,
" मुरली " तुझे मेरे दिल में बसाऊँ,
चांद तारे तेरे आंचल में बांधकर,
तेरे बदन पर मैं लहराऊँ। ..

