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Bharat Bhushan Pathak

Romance

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Bharat Bhushan Pathak

Romance

तड़पन

तड़पन

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तड़पते हो तुम जब भी।

तड़पते हैं हम तब ही।।

तड़पकर ही तो जाना है

तड़पन क्या चीज है होती।

कहा था मुझसे लोगों ने

तड़पना छोड़ दे अब तू

कहा था मैंने भी तब तो

सुन लो तुम भी ऐ लोगों

ये तड़पन चीज है ऐसी

मजा भी खूब देती है।



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