STORYMIRROR

Dinesh paliwal

Action Inspirational

4  

Dinesh paliwal

Action Inspirational

स्वतंत्र

स्वतंत्र

2 mins
233

वर्ष चौहत्तर बीत चुके हैं,

जब से हुआ है देश स्वतंत्र,

पर क्या समझा अब तक हमने,

इस आज़ादी को जीने का मंत्र।

कुछ कसौटी कुछ प्रश्न खड़े कर,

चल खुद से ये पूछे हम आज,

क्या आज़ाद हुए हम सच में हैं,

या गया हैं बस गोरों का राज।


ऊंच नीच और जात पात,

का तब भी बजता था डंका,

पर आज़ाद हुए हम उससे क्या,

इसमें हैं भारी शंका,

तब न्याय, धर्म सब होता था,

रसूख और धन वालों को,

आज कौन सा न्याय मिल रहा,

हैं गरीब के लालों को,

तब आजादी ना थी हमको,

खुद अपना देश चलाने की,

आज स्वतंत्र हुए हैं हम,

आज़ादी पाई देश जलाने की।


क्या इसी स्वतंत्रता प्राप्ति को ही,

वो मतवाले सब सुख भूले थे

क्या इस दिन को ही पाने को,

फांसी के फंदे पर झूले थे।

रूह तड़पती होंगी उनकी,

देख देश का ऐसा हाल,

स्वतंत्रता क्या ऐसी चाही थी,

रह रह उस पर होगा मलाल।


वो स्वतंत्रता पाई अंग्रेजों से,

अब और एक आंदोलन हो,

बने स्वतंत्र वीर भारतीय एक एक,

हर में एक वल्लभ, मोहन हो,

गली गली, चौराहों पर बस,

यही गूंजती मल्हारी हो,

सब सम हैं, सब भारतीय हैं,

यही एक पहचान हमारी हो।

देश प्रथम हैं गौड़ सभी कुछ,

समाहित भावना जब हो जाएगी

उस दिन सच्ची आज़ादी समझो,

इस देश को भी मिल पाएगी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Action