सवेरे
सवेरे
आ निकले थे कितनी सवेरे
दर्शन हो जाते थे तेरे
कैसी जुदाई यह कैसी सजा
दिल नइयो लगदा तेरे बिना..... 2
1
क्या बुर्का पहना चांद ने आज अंबर सुना सुना
पतझड़ सा मुरझा गया सावन का महीना
आज सवेरे पास से गुजरी अनजानी बनकर हसीना
दिल नइयो लगदा तेरे बिना...... 2
आ निकले
दर्शन
2
अपने थे वह हुए बेगाने
याद आते हैं वह बीते जमाने
हम ही बन गए उनके निशाने
उनके लिए ही सांसे थी दिल धड़कता था सिना
दिल नइयो लगदा तेरे बिना...... 2
3
निशाने जो ऐसे सीधे वार कर गए
प्यार भरे नैना तलवार बन गए
बेवफा वह अपना काम कर गए
उनकी निगाहें लगा चुकी थी आखिरी निशाना
दिल नइयो लगदा तेरे बिना

