सूरज
सूरज
अपनों के लिए कितना जलना पड़ता है
सूरज हूं अकेला ही चलना पड़ता है
खुदको खोके मैंने तुझे बनाया
खुद था बैठा इसलिए तुझे चलाया
अपने साथ रखने को दुनिया से लड़ गया
और तू मुझे गिरता देख पीछे मुड़ गया
चलता था जिन उंगलियों के सहारे
आज उन्ही हाथों में लाठी छोड़ गया
जिस घर में तेरा बचपन गुजरा
आज उसी घर को तू जलता छोड़ गया!
