STORYMIRROR

karan ahirwar

Abstract Drama Thriller

4  

karan ahirwar

Abstract Drama Thriller

फ्रीवर्स

फ्रीवर्स

1 min
240

समय का कैसा ये खेल निराला

मेहनत भर सक हर दम हर बार 

फिर भी मनचाहा फल मिला ना


समय और नसीब दो साथी

पर मेहनत ही मेरे हाथ थी

मैंने तो जमकर पसीना बहाया

फिर भी किस्मत को मोड़ ना पाया


हर दम बस यही डर सताए

क्या व्यर्थ होगी ये अभिलाषाएं अपेक्षाएं

या कोई होगा जो आकर मुझे जिताए

मेरा सपना, मेरी कल्पना, मेरा जीवन

हर क्षण इस असमंजस में बीते

क्या ऐसे ही गिन गिन दुख बीतेगा जीवन


मैने तो सुख ही चाहा

पर हमेशा दुख ही पाया

कुछ तो काम मेरा आसान करो

हे ! कलम तुम तो मेरा सम्मान करो


तुमको शिद्दत से उठाता हूं मैं

हर बात तुम्हे बतलाता हूं मैं

तुम्ही मेरे सुख दुख के साथी हो

दूर देख तुमको मुझसे घबराता हूं मैं


ए कलम तुमने मेरा बोझ ढोया

तुम्हारे साथ ही सहसा रोज रोया

तुमने संभाले विचार मेरे

तुमने संवारी भावनाएं मेरी

तुमसे दूर जाना या तुमको छोड़ अकेला

मर जाऊंगा मर जायेगी साधनाएं मेरी


तुम्ही तो मेरे हमदम

तुम्ही हो मेरे हम कदम

तुमसे नाता जोड़ा तो चैन की नींद मैं सोता हूं

वर्षो तक अकेला था अब पूरा तुम्हीं से होता हूं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract