STORYMIRROR

Ashwani Gupta

Abstract

3  

Ashwani Gupta

Abstract

आजमाते हैं

आजमाते हैं

1 min
12.2K

दिल पे पत्थर रख कर हम 

दूसरों का दिल बहलाते हैं।


कोई क्या समझेगा,

दिल कितना रोता है जब 

होठों से बेवजह मुस्कुराते हैं।


फिर भी वो ही कृतघ्न लोग 

मौका पाकर हमें ही आजमाते हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract