STORYMIRROR

karan ahirwar

Abstract

3  

karan ahirwar

Abstract

तेरे शहर वाले

तेरे शहर वाले

1 min
196

तेरे साथ की यादों ने मुझे जिंदा रखा

तू आएगा इसी आस में एक परिंदा रखा

तूने कसम जो दी थी मुझे एक इरादे की

बास्ते उसके दबाकर अंदर एक दरिंदा रखा


नये लोगों की खोज में दूर निकले

भोले चेहरे दिल के क्रूर निकले

चाहकर भी दिल से मिलने से घबराये

ये तेरे शहर वाले कितने मजबूर निकले!

 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract