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सूरज और हम

सूरज और हम

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तेज धूप को देख ख्याल आया

सूरज तू तो एक शाश्वत सत्य

फिर भी तेरे साथ कैसा व्यवहार।


सर्दी के मौसम में तहेदिल से

खिड़कियाँ दरवाजे खोल होता स्वागत

सुबह से शाम सूरज की दिशा में

खुद को घुमाते,


पर गर्मी में तुझको देखना ही नहीं चाहते

बंद खिड़की दरवाजा कर

तेरा आगमन रोकते

साथ-साथ तेरे रूप को कोसते।


बरसात में अपनी जरूरत के अनुसार

कभी अधिक और कभी कम

तेरा स्वागत हैं करते।


अब अपना सोचे,

हम तो नश्वर प्राणी

हमारी जिंदगी में

लोगों का ऐसा ही व्यवहार।


जब किसी को होती जरूरत तो नमस्कार

नहीं तो तू कौन, तुझे धिक्कार

इसलिए इसे दिल से ना लगाएँ

जब लोगों ने बख्शा ना सूरज को

तो हम कौन, हमारी औकात है क्या।।


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