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Sunita Katyal

Inspirational


4.5  

Sunita Katyal

Inspirational


अकेलापन और लॉक डाउन

अकेलापन और लॉक डाउन

1 min 437 1 min 437

तन्हाई मुझे हमेशा से भाती थी,

बच्चो से इसी बात पर मेरी बहस भी हो जाती थी !

वो कहते, "आप हर समय घर में क्यों बंद रहते हो,

कभी तो बाहर निकला करो !

पीलीभीत ,बरेली ,शाहजहांपुर की बड़ी पुरानी सरकारी कोठियों में,

जहां पीपल और बरगद के बड़े बड़े पेड़ चारों ओर थे !

पतिदेव की नौकरी के दौरान, मै कई कई दिन अकेली रही !

नहीं मै कभी डरती नहीं थी !

तब माहौल सामान्य था ,

साधन और सुविधाओं पर बंदिश नहीं थी !!

तब के अकेलेपन और लॉक डाउन की तन्हाई में अंतर बहुत है !

इन दिनों साधन और सुविधाएं सीमित,

चारों ओर खौफ के हालात ,

खुद को यतन से समझाना पड़ता है....

हौसला रखो , सावधानी रखो और प्रार्थना करो.....

देखना ये दिन भी फुर्र से उड़ जाएंगे !!!!


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