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VanyA V@idehi

Inspirational

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VanyA V@idehi

Inspirational

आत्मसम्मान का मान

आत्मसम्मान का मान

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आज जो सच की राह पे चलने से डर गया।

उस इंसान का आत्म सम्मान ही मर गया।।


मेहनत की रोटियों से जो करता रहा गुज़र,

सुख-चैन से वो रह सका जीवन सुधर गया।।


जो आदमी बुराई के रास्ते पे चल पड़ा,

तो उसकी ज़िंदगी से सुहाना सफ़र गया।।


आकाश में गए थे ख़ुशी को तलाशने,

आनंद इस धरा का भी उनसे बिसर गया।।


पैसे अधिक कमाने को परदेश जो गए ,

परिवार का सुकून भी उनका बिखर गया।।


हम साथ-साथ रहते थे परिवार में सभी,

यारों! मुहब्बतों का वो मौसम किधर गया।।


यह कौन सी तरक़्क़ी पे हम लोग चल पड़े,

अपना वजूद भी जहां मुश्किल से भर गया।।


महत्वपूर्ण यादगार  बना है  वही  समय,

जो भी सभी के साथ ख़ुशी से गुज़र गया।।



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