बढ़ते चलो
बढ़ते चलो
बढ़ते जाते वीर हैं , बाधाओ को चीर।
सेना है ये हिंद के ,उधम साहसी धीर।।
ऊँचा लहराते ध्वजा, वीर सजग हर बार।
माटी पावन कर दिए ,अरि को क्षण में मार ।।
फूँक फूँककर पग रखें ,हर रास्ते पे वीर ।
पस्त करे हर शत्रु को ,रखे निशाने तीर ।।
माटी पावन चूमकर, लड़ते रहते वीर।
धरती माता के लिए, हँसकर सहते पीर ।।
डटे रहे तूफान में ,जागे हैं दिन-रात।
योद्धा बलशाली बने ,अलग वीर की बात ।।
