वसुधा पर मनुजता को पनपाना है
वसुधा पर मनुजता को पनपाना है
अब श्री राम का शुभागमन हो गया ,
तो अब मिल कर भारत को भव्य बनाना है !
नित पथ कर्तव्य पर बढ़ते जाना ,
सार्थक सत्य कर्म का सुमन बरसाना है !
भक्ति शक्ति से प्रतापी अद्भुत बनकर ,
सुरसरि का एक अनुपम सृजन बनाना है !
प्रखर प्रज्ञा की दिव्य प्रतिभा से,
इस वसुधा पर मनुजता को पनपाना है !
राष्ट्र के कण - कण को आलोकित करने,
दिव्य प्रकाश पुंज अब सर्वत्र लहराना है !
क्षुद्र वासना और स्वार्थ का त्याग कर,
कर उत्थान राष्ट्र का इसे और आगे बढ़ाना है !
पवन पुत्रों ज़रा शक्ति अपनी पहचानो ,
अब ईर्ष्या द्वेष और कुंठा की लंका जलाना है !
केवट व शबरी को जैसे उद्धारे राम ने,
हमें भी वैसे ही दीन दुखियों को गले लगाना है !
रोम रोम में राम नाम का अलख जलाकर,
शौर्य पराक्रम से पाषाणों में प्रसून खिलाना है !
विश्वास के दीप जलाकर अपने राघव को,
समस्त राजाओं का सबसे श्रेष्ठ राजा बनाना है !
सदियां बीतीं और कई युग बदला, अब ,
भारत के गौरवशाली इतिहास को में लाना है !
दैहिक दैविक भौतिक ताप मिटा कर,
पुनः राजस्व श्री रामचंद्र जी का लाना है !
