STORYMIRROR

Sunita Katyal

Others

2  

Sunita Katyal

Others

रात ये कह कर छेड़ती है

रात ये कह कर छेड़ती है

1 min
162

आँख खुली और देखी घड़ी

लो शुरू हो गई कवायद

वक़्त के साथ रेस लगाने की

कभी वक़्त आगे और कभी हम

शाम के आते आते शरीर दे देता है

जवाब


बस और अपने बस में नहीं

दिल कहता है जाने दो ना सूरज को

जो जाता है

वक़्त का भी छोड़ो पीछा

देखो जरा कैसी मंद बयार चल रही

चाँद भी आसमान पर धीरे धीरे

सरक रहा

रात भी ये कह कर छेड़ती है

तब छोड़ो भागना आओ साथ मेरे

देखो ख़्वाब उन सुहाने दिनों के

जो जिंदगी में तुमने बिताए


Rate this content
Log in