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Amit Bhatore

Drama

3  

Amit Bhatore

Drama

सुबह का भुला

सुबह का भुला

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सुबह का भुला

लौट आता है अक्सर,

देर शाम तक बोझिल मन से,

महत्वकांक्षा को रास्ते में छोड़कर,


मुश्किल लगता है तन्हा होकर,

ख्वाहिशों का बोझ उठाकर चलना,

गलतियों से बचना, गिरने से पहले संभलना, 

नियति मानकर सब कुछ भूलने के बाद,


वापस लौटकर मन को

मिलती है सुकून की अनुभूति।


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