Amit Bhatore
Inspirational
ज्ञान, रुचि, मनोरंजन कह लो या प्यार
इसी में है सभी बातों का सार
कोई जिज्ञासा हो या शंका
किताबों से मिलता समाधान
आनंद और उम्मीदों के साथ
किताबों का है अपना अलग संसार
किताबों के बिना जीवन अधूरा
बचपन से बुढ़ापे तक प्रिय साथी है किताब।
फ़िल्म
किताब
वक्त
मजदूर ही तो ह...
साथ में मिलकर...
सुंदरता को दे...
तुम नारी ही ह...
ग्रीष्मावकाश
नेह ह्रदय का ...
सच की राह पे ...
होली के रंग है,अनेक पर गर मित्र न हो एक। होली के रंग है,अनेक पर गर मित्र न हो एक।
असफलता से निराश ना हो,अच्छे दिन भी आएंगे। असफलता से निराश ना हो,अच्छे दिन भी आएंगे।
हाँ, टूट कैसे सकती हो तुम! तुम तो घर का बंधन हो। हाँ, टूट कैसे सकती हो तुम! तुम तो घर का बंधन हो।
वही राग है वही फाग है जब मिले रंग से रंग सागर नदी दरिया छोटी मिले जाए इक संग वही राग है वही फाग है जब मिले रंग से रंग सागर नदी दरिया छोटी मिले जाए इक संग
जो हारने को राजी नहीं उसे हराओगे कैसे। जो हारने को राजी नहीं उसे हराओगे कैसे।
वो मन का मौजी मतवाला, ईश्वर है उसका रखवाला ॥ वो मन का मौजी मतवाला, ईश्वर है उसका रखवाला ॥
सुदूर, मन की गहरी कंदराओं में सुप्त, कुछ चरित्रों को, फिर से गढ़ती है। सुदूर, मन की गहरी कंदराओं में सुप्त, कुछ चरित्रों को, फिर से गढ़ती है।
ग़र लेने की चाह नहीं .. जो दिया उसे गिनने की परवाह नहीं ..। ग़र लेने की चाह नहीं .. जो दिया उसे गिनने की परवाह नहीं ..।
वो देखो चली जा रही है , कागज़ की नाव। वो देखो चली जा रही है , कागज़ की नाव।
तुम्हें विकसित करनी ही होगी अपनी रीढ़ छोड़नी होगी सुविधा भोगी जिंदगी। तुम्हें विकसित करनी ही होगी अपनी रीढ़ छोड़नी होगी सुविधा भोगी जिंदगी।
दख़लंदाज़ी कर जाती है जब हदें पार तब रह नहीं जाता ख़ुद पर इख़्तियार। दख़लंदाज़ी कर जाती है जब हदें पार तब रह नहीं जाता ख़ुद पर इख़्तियार।
रामायण पर मौन रहे तो , कल फिर वेद पुराण जलेंगे। रामायण पर मौन रहे तो , कल फिर वेद पुराण जलेंगे।
मीत दुश्मन को बनाना तुम, होली जब जलाना तुम मीत दुश्मन को बनाना तुम, होली जब जलाना तुम
सही सुना जी आपने मैं ताकतवर स्त्री हूँ जी हाँ मैं स्त्री हूँ… सही सुना जी आपने मैं ताकतवर स्त्री हूँ जी हाँ मैं स्त्री हूँ…
नारी तू नारायणी तू ही सृजनहार है नारी के रूप अनेक हर घर की पहचान है। नारी तू नारायणी तू ही सृजनहार है नारी के रूप अनेक हर घर की पहचान है।
हे अन्नदाता तुम्हें शत-शत मेरा प्रणाम भेद धरा का सीना पैदा करते हो धान। हे अन्नदाता तुम्हें शत-शत मेरा प्रणाम भेद धरा का सीना पैदा करते हो धान।
जीवन की कोई कहानी नहीं, संघर्ष के बिना। होते नहीं हैं सपनें पूरे कभी, संघर्ष के बिना। जीवन की कोई कहानी नहीं, संघर्ष के बिना। होते नहीं हैं सपनें पूरे कभी, संघर्ष ...
जो करना है आज कर लो, रिटायरमेंट के बाद का इंतजार क्यों? जो करना है आज कर लो, रिटायरमेंट के बाद का इंतजार क्यों?
कुछ बातें भूल जाना ही अच्छा वरना चैन से जी नहीं पाओगे. कुछ बातें भूल जाना ही अच्छा वरना चैन से जी नहीं पाओगे.
निभाओ यारी दिल से; कोई हर्ज नहीं पर यारी में अपने ' कद ' का भी ध्यान रखना। निभाओ यारी दिल से; कोई हर्ज नहीं पर यारी में अपने ' कद ' का भी ध्यान रखना।