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S Ram Verma

Romance


5.0  

S Ram Verma

Romance


सपने नए !

सपने नए !

1 min 259 1 min 259

ख़्वाबों के समंदर में 

एक टुकड़ा उम्मीदों का

जब फेंकता हूँ 

मैं बड़ी शिद्दत से।


कुछ बूँदें आस की 

चलक ही आती हैं 

मेरे चेहरे पर भी

मेरे लिए तुम उन 

बूंदों की ठंडक हो।


ताज़गी भरती हो 

मेरी रगों में हर पल

हर रोज़ मेरा तुम 

एक दम नया करती हो  

हर रोज़ मुझमे 

सपने नए भरती हो !


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