Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

S Ram Verma

Romance


5.0  

S Ram Verma

Romance


सपने नए !

सपने नए !

1 min 225 1 min 225

ख़्वाबों के समंदर में 

एक टुकड़ा उम्मीदों का

जब फेंकता हूँ 

मैं बड़ी शिद्दत से।


कुछ बूँदें आस की 

चलक ही आती हैं 

मेरे चेहरे पर भी

मेरे लिए तुम उन 

बूंदों की ठंडक हो।


ताज़गी भरती हो 

मेरी रगों में हर पल

हर रोज़ मेरा तुम 

एक दम नया करती हो  

हर रोज़ मुझमे 

सपने नए भरती हो !


Rate this content
Log in

More hindi poem from S Ram Verma

Similar hindi poem from Romance