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Hilal Saeed

Romance


4.3  

Hilal Saeed

Romance


उस रिश्ते का तसववुर

उस रिश्ते का तसववुर

1 min 35 1 min 35

वो एक शख़्स खयालों में सवार होने लगा 

फिर उसका तसव्वुर तन्हाई में यार होने लगा।


कभी ख़ूबसूरत सा था वो रिश्ता

फिर शायद जो मुझे बोझ लगने लगा।


मशवरा किया उसने मेरा किसी शख़्स से 

फिर वो शख़्स उसके करीब होने लगा।


फिर उसको एक अरसे बाद याद आया

की शायद वो मुझसे अब बोर होने लगा।


तीसरा शख़्स जो शामिल हुआ बीच सफर में

फिर वो अपने हातों की गिरफ्त को कमजोर

कहने लगा।


मुहब्बत उस वक़्त मुझे बोझ लगने लगी 

फिर वो शख़्स कुछ ऐसे भी हाथों से छूटने लगा।


जिससे कभी ना शायद रूठेगे सोचा था 

फिर उस एक शख़्स से भी में अब रूठने लगा।


फिर उसने मुहब्बत भी सिखाई मुझे

मैं लफ्जी मुहब्बत करता था जिस्मों को

शामिल कर ना सका।



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