STORYMIRROR

Vikas Sharma

Abstract Inspirational

4  

Vikas Sharma

Abstract Inspirational

संवेदना

संवेदना

1 min
398

संवेदना का सम्बन्ध इंसानियत से है

संवेदना का जुड़ाव संस्कारों से है

संवेदना का जन्म पूर्व जन्मो के कर्मों से है

संवेदना एक दर्द का भाव और अहसास है


शिरडी के साईं ने बिन भेदभाव बिन जातिवाद सबके प्रति संवेदना रखी

प्रभु यीशु मसीह ने दीन दुखियों लाचारों के प्रति संवेदना रखी

सिख धर्म ने लंगर सेवा द्वारा हर गुरुभक्त और भूखे के प्रति संवेदना रखी

प्रभु श्रीराम ने तो नर -नारी -पशु -पक्षी -राक्षस तक के प्रति संवेदना रखी


आज इस कलयुग में संवेदना शनै शनै दम तोड़ रही है

इस भागदौड़ भरी जिंदगी में संवेदना मुंह मोड़ रही है

सिमटते -टूटते -बिखरते परिवारों में संस्कार ही दफ़न होते जा रहे हैं

तो नई पीढ़ी संवेदना की वेदना कैसे समझेगी


संवेदना को जीवित रखना है तो मैं को त्यागना होगा

संवेदना का मर्म समझना है तो हम की ताकत को समझना होगा

संवेदना को प्रेम में बदलना है तो मोबाइल लैपटॉप टीवी को छोड़ साथ में बैठना होगा

जब एक दूसरे के प्रति करुणा -प्रेम -समर्पण -त्याग जाग्रत होंगे

तो संवेदना स्वतः धारा बन धरा पर बहेगी


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract