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संदीप सिंधवाल

Tragedy

4.0  

संदीप सिंधवाल

Tragedy

संकट की घड़ी

संकट की घड़ी

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हर जगह खड़ी

संकट की घड़ी।


एकांत मजबूरी

चौकसी है कड़ी।


संभले है जो भी

आफत नहीं बड़ी।


प्रशासन का जोर

जान की उन्हें पड़ी।


हर शख्स पर है

उनकी नजर गड़ी।


धरना गायब जहां

महिलाएं थीं अड़ी।


सबक लें वहां से

जहां लाशें हैं सड़ी।








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