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Shailaja Pathak

Tragedy

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Shailaja Pathak

Tragedy

सम्बन्ध

सम्बन्ध

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क़ाश ! घरों में बहुत सी दीवारें ना होती,

तो सब साथ उठते, बैठते, खाते, पीते, कहाँ जाते ?


घर बड़े हो गए, दिल छोटे,

सम्बन्ध भी अब नॉनस्टिक बर्तनों की तरह हो गए,


सम्बन्धों को खाने की तरह चिपकने नहीं देते।


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