Shailaja Pathak
Tragedy
क़ाश ! घरों में बहुत सी दीवारें ना होती,
तो सब साथ उठते, बैठते, खाते, पीते, कहाँ जाते ?
घर बड़े हो गए, दिल छोटे,
सम्बन्ध भी अब नॉनस्टिक बर्तनों की तरह हो गए,
सम्बन्धों को खाने की तरह चिपकने नहीं देते।
रामायण में मह...
मै नदी हूं
बोलो ना
अंगूठी
मेरा चांद
रेल की पटरी
कृति
मैं और तुम
अंगारे
यादें
ये वही लोग है जो आज तुम्हें याद कर कल तुम्हें भूल जाएँगे। ये वही लोग है जो आज तुम्हें याद कर कल तुम्हें भूल जाएँगे।
सच्चाई की फसल तैयार करने के लिये ,बेचे जाते झूठ के बीज़। ख़रीद कर बोये जाते झूठ के बीज सच्चाई की फसल तैयार करने के लिये ,बेचे जाते झूठ के बीज़। ख़रीद कर बोये जाते झ...
हरपल अपनों संग गुजारो, जाने कौन खो जाये काल में। हरपल अपनों संग गुजारो, जाने कौन खो जाये काल में।
बूरी तरह से टूट कर गहन अँधेरे में, रो लेती हूँ जी भरकर और कोई देख नहीं पाता... बूरी तरह से टूट कर गहन अँधेरे में, रो लेती हूँ जी भरकर और कोई देख नहीं पाता.....
मरे हुये / डरे हुये, शतायु होने का दम्भ भरते ज़िंदा आदमी। मरे हुये / डरे हुये, शतायु होने का दम्भ भरते ज़िंदा आदमी।
आपने तो हमें कूड़ा ही समझा ! कूड़े के ढेर की तरह आपने निकाला अपने महानगर से ! आपने तो हमें कूड़ा ही समझा ! कूड़े के ढेर की तरह आपने निकाला अपने महानगर ...
अहम जड़ित ज्ञान नहीं है कविता। मन बहलाने का साध्य नहीं है कविता। अहम जड़ित ज्ञान नहीं है कविता। मन बहलाने का साध्य नहीं है कविता।
न तितली,न जुगनू न गुब्बारे जाने कहाँ गए वो सारे के सारे! न तितली,न जुगनू न गुब्बारे जाने कहाँ गए वो सारे के सारे!
ऐसे नहीं जाना था ड्यूड कम बैक करना था ना। ऐसे नहीं जाना था ड्यूड कम बैक करना था ना।
सोचा जब भी दिल ने तुम्हें तुम रूबरू आ गये। सोचा जब भी दिल ने तुम्हें तुम रूबरू आ गये।
बोला क्यों रोते हो मैं भी हूँ तुम्हारे जैसा। बोला क्यों रोते हो मैं भी हूँ तुम्हारे जैसा।
तो क्यों न ख़ुद के लिए ख़ुश रहूँ मैं तो हां मेरे लिए ख़ुश हूँ मैं।कवर है तो क्यों न ख़ुद के लिए ख़ुश रहूँ मैं तो हां मेरे लिए ख़ुश हूँ मैं।कवर है
तुम्हें मेरा हंसता हुआ चेहरा तो दिखा मगर सिसकती हुयी रूह नहीं। तुम्हें मेरा हंसता हुआ चेहरा तो दिखा मगर सिसकती हुयी रूह नहीं।
मगर संभालते थे दोनों एक-दूजे को जैसे सागर नदियों को संभालता है मगर संभालते थे दोनों एक-दूजे को जैसे सागर नदियों को संभालता है
लाशों का भी अपमान हुआ तो विचलित हो उठी है ममतामयी धरा। लाशों का भी अपमान हुआ तो विचलित हो उठी है ममतामयी धरा।
तुम्हारी बातों की वो चुभन, तुम्हारी बातों की वो चुभन,
कभी वो दिन भी थे जब हर बात हमारी तुम्हें बड़ी ही प्यारी लगती थी! कभी वो दिन भी थे जब हर बात हमारी तुम्हें बड़ी ही प्यारी लगती थी!
चाइना तेरी कैसी ये चाल कर दिया तूने बेहाल ! चाइना तेरी कैसी ये चाल कर दिया तूने बेहाल !
रास्ते वीरान हो गए सड़कें गुमनामी में खो गयी रास्ते वीरान हो गए सड़कें गुमनामी में खो गयी
बंद में सन्नाटा कहाँ है बंद में सन्नाटा कहाँ है