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parag mehta

Tragedy


5.0  

parag mehta

Tragedy


शरर!!!!!!!

शरर!!!!!!!

1 min 211 1 min 211

ये मिज़ाज भी बदल गया 

जिस पर हमें कभी गुरूर था।


जाना हमने अभी किसकी खातिर 

उसकी नब्ज़ में बसा वो शरर था। 


फासले भी ये कितने अजीब 

दूर हो कर भी इतने करीब। 


ये खेल यूँ ही तो नायाब है 

एक खूबसूरत अंजाम है। 


जान कर भी अनजान रह गया 

आखिर कैसे तू बह गया। 


दर्द तो मिलना ही था तुझे 

प्यार इतनी शिद्दत से कहाँ तू कर गया !!


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