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Chandra prabha Kumar

Fantasy

4  

Chandra prabha Kumar

Fantasy

शीतल छांव

शीतल छांव

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शीतल छांव

वेत्रवति की

शीतल छाँह तले,

छाया सुखकर

मंद समीर बहे। 


सूर्यातप का

वहॉं न बँधता चंदोवा। 

मन धीरे धीरे बहता जाए,

यादों में घुलता जाए। 


स्वप्नों की स्वर्णिम पाँखें

मन झूमा झूमा जाए,

अपने को भूला जाए। 

धीरे धीरे बहता जाए।


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