Chandra prabha Kumar
Fantasy
शीतल छांव
वेत्रवति की
शीतल छाँह तले,
छाया सुखकर
मंद समीर बहे।
सूर्यातप का
वहॉं न बँधता चंदोवा।
मन धीरे धीरे बहता जाए,
यादों में घुलता जाए।
स्वप्नों की स्वर्णिम पाँखें
मन झूमा झूमा जाए,
अपने को भूला जाए।
धीरे धीरे बहता जाए।
हाइकु
सूरज
चेतना विस्तार
श्रीप्रभु के ...
आ बरसो मेघा
आज रक्षाबन्धन
जन जन का प्या...
अमृत महोत्सव
प्रिय मेरा
ऑंवले का वृक्...
थी तो बहुत पते की बात पर धरती पर यह युग कब आयेगा ! थी तो बहुत पते की बात पर धरती पर यह युग कब आयेगा !
आजमा कर देखना किताबों से जीवन बदल जाती है। आजमा कर देखना किताबों से जीवन बदल जाती है।
विस्तार कर रही है कभी और जाने के लिए है मग्न वो अभी चाहत से मिल पाने के लिए। विस्तार कर रही है कभी और जाने के लिए है मग्न वो अभी चाहत से मिल पाने क...
क्या जाएगा मेरा रे बंदे। दो लफ्ज़ मीठे बोल रे बंदे दो लफ्ज़ मीठे बोल। क्या जाएगा मेरा रे बंदे। दो लफ्ज़ मीठे बोल रे बंदे दो लफ्ज़ मीठे बोल।
इसकी कभी ना फीकी पड़ेगी शान, करती रहूंगी सदा इसका सम्मान। इसकी कभी ना फीकी पड़ेगी शान, करती रहूंगी सदा इसका सम्मान।
मैंने कुछ गीत लिखे हैं तेरी खनकती हुई पाज़ेब पर मैंने कुछ गीत लिखे हैं तेरी खनकती हुई पाज़ेब पर
बसाना ही है तो दिल में बसावो, क्योंकि वही तो अपने बसते है।" बसाना ही है तो दिल में बसावो, क्योंकि वही तो अपने बसते है।"
आग सीने में है लगी जी रहा हूँ घूँट-घूँट के मैं अभी सुन लो न मेरे यारों, आग सीने में है लगी जी रहा हूँ घूँट-घूँट के मैं अभी सुन लो न मेरे यारों,
आज मखमली बिस्तर पर भी चिंता से व्यथित हों कर करवट - बदल - बदल के रात बिताते हैं , आज मखमली बिस्तर पर भी चिंता से व्यथित हों कर करवट - बदल - बदल के रात बिताते हैं ...
उदासी हो या डर, बिना कुछ बोले भी यह सब जता देती हैं। हाँ दोस्तों, आँखें भी बोलती है उदासी हो या डर, बिना कुछ बोले भी यह सब जता देती हैं। हाँ दोस्तों, आँखें ...
पर अब इनके संस्कारों पे अधिकार केवल तुम्हारा होगा यह वनवास अब सीता अब तुम्हारा होगा। पर अब इनके संस्कारों पे अधिकार केवल तुम्हारा होगा यह वनवास अब सीता अब तुम्हार...
तभी तो कहता कवि कोई , धन्य है, तू धन्य है, कोटी कोटी, तुझे नमन है। तभी तो कहता कवि कोई , धन्य है, तू धन्य है, कोटी कोटी, तुझे नमन है।
गाँव-गली घूम घूम कर पहिये चलाना गिली मिट्टी में छोटे बड़े घरौंदे बनाना गाँव-गली घूम घूम कर पहिये चलाना गिली मिट्टी में छोटे बड़े घरौंदे बनाना
शैम्पेन के बुलबुले व भीनी खुशबू चारों ओर फैली थी। शैम्पेन के बुलबुले व भीनी खुशबू चारों ओर फैली थी।
ये एलियन की खबरें पढ़ने का ही सब नतीजा है, मुझे ही बना दिया एलियन, कैसा सपना देखा है। ये एलियन की खबरें पढ़ने का ही सब नतीजा है, मुझे ही बना दिया एलियन, कैसा सपना...
उम्मीद है अब तुम भी कहोगे ... एक चाय और चलेगी .. उम्मीद है अब तुम भी कहोगे ... एक चाय और चलेगी ..
वह यथार्थ की अनुभूति देता पूरा होता है। वह यथार्थ की अनुभूति देता पूरा होता है।
पहले मन के दरवाजे खोलने के भी, काम आती थीं यह खिड़कियांँ। अब तो स्वयं ही बंद रहती हैं पहले मन के दरवाजे खोलने के भी, काम आती थीं यह खिड़कियांँ। अब तो स्वयं ही ब...
कुछ भी नहीं है असंभव, ये हमें विज्ञान बतला रहा। कुछ भी नहीं है असंभव, ये हमें विज्ञान बतला रहा।
यह जरूर है कभी जल्दी तो कभी देर से। यह जरूर है कभी जल्दी तो कभी देर से।