Chandra prabha Kumar
Fantasy
शीतल छांव
वेत्रवति की
शीतल छाँह तले,
छाया सुखकर
मंद समीर बहे।
सूर्यातप का
वहॉं न बँधता चंदोवा।
मन धीरे धीरे बहता जाए,
यादों में घुलता जाए।
स्वप्नों की स्वर्णिम पाँखें
मन झूमा झूमा जाए,
अपने को भूला जाए।
धीरे धीरे बहता जाए।
हाइकु
सूरज
चेतना विस्तार
श्रीप्रभु के ...
आ बरसो मेघा
आज रक्षाबन्धन
जन जन का प्या...
अमृत महोत्सव
प्रिय मेरा
ऑंवले का वृक्...
कहीं प्यार तो नहीं समझाना चाहता है परवाना। कहीं प्यार तो नहीं समझाना चाहता है परवाना।
जब नाप जाते थे कई किलोमीटर का सफ़र जब ज़ोर का ठहाका लगाकर हँसते हँसाते थे जब नाप जाते थे कई किलोमीटर का सफ़र जब ज़ोर का ठहाका लगाकर हँसते हँसाते थे
आप प्यार की, भावना से देखेंगे, और उसे गले से लगाएंगे। आप प्यार की, भावना से देखेंगे, और उसे गले से लगाएंगे।
तुम्हारे बिना सब सूना हो जायेगा खाली ये संसार। तुम्हारे बिना सब सूना हो जायेगा खाली ये संसार।
जो मेरे आँसुओं को भी अपनी मुट्ठी में बंद कर लेते थे जो मेरे आँसुओं को भी अपनी मुट्ठी में बंद कर लेते थे
और ये दुनिया जो कहती है सबर रख वक्त हाथों में आने तो दे, मैं घड़ियों में चाबी ना भरती और ये दुनिया जो कहती है सबर रख वक्त हाथों में आने तो दे, मैं घड़ियों में चाब...
मेरे पास तू आ जा मेरे दिल दे मेहरमां, मेरे दिल दे मेहरमां मेरे पास तू आ जा मेरे दिल दे मेहरमां, मेरे दिल दे मेहरमां
देखें कौन पाता उसका प्यार, कैसे दे पाता, बाकि भंवरों को मात। देखें कौन पाता उसका प्यार, कैसे दे पाता, बाकि भंवरों को मात।
अश्क जो बहे ऐसा नहीं दिल में एक चुभन सी है। अश्क जो बहे ऐसा नहीं दिल में एक चुभन सी है।
इसके हर शब्द हैं धन मेरा छंदों में नहाता तन मेरा इसके हर शब्द हैं धन मेरा छंदों में नहाता तन मेरा
बहु भाषा में लिखवा देता जब बोलूं तो झुठला देता बहु भाषा में लिखवा देता जब बोलूं तो झुठला देता
बजाने की भी आदत तो लगा लीजिए। फिर सुनने की आदत भी पड़ जाएगी। बजाने की भी आदत तो लगा लीजिए। फिर सुनने की आदत भी पड़ जाएगी।
सलिला का सिंधु से संगम कवि जब लिखता काव्य नवीन। सलिला का सिंधु से संगम कवि जब लिखता काव्य नवीन।
अब कमरा एकदम फिट था ठहरने के लिए। अब कमरा एकदम फिट था ठहरने के लिए।
ऐसा लगता है जैसे मैंने एक मुलाकात पा ली है। ऐसा लगता है जैसे मैंने एक मुलाकात पा ली है।
ये मन जाए उमंगों से भरा कोई रंग उड़ाये, कोई झूम के गाये ये मन जाए उमंगों से भरा कोई रंग उड़ाये, कोई झूम के गाये
दिल धड़कता तो है आज भी तेरे बिना। मगर धड़कन शायद रुक जाना चाहती है। दिल धड़कता तो है आज भी तेरे बिना। मगर धड़कन शायद रुक जाना चाहती है।
कुछ नहीं कर पाया मैं। अब देख ना, अपने लाल को, लोग अमर बनाने में लगे हैं। कुछ नहीं कर पाया मैं। अब देख ना, अपने लाल को, लोग अमर बनाने में लगे हैं।
अगर जान भी जाए बाते कल की कोशिश जवाब दे जाए हमारी अगर जान भी जाए बाते कल की कोशिश जवाब दे जाए हमारी
शोहरत, दौलत, रुतबा, सब हुए बेमाने से, करवटें ली है साल ने बेहद फरेबी। शोहरत, दौलत, रुतबा, सब हुए बेमाने से, करवटें ली है साल ने बेहद फरेबी।