Chandra prabha Kumar
Fantasy
शीतल छांव
वेत्रवति की
शीतल छाँह तले,
छाया सुखकर
मंद समीर बहे।
सूर्यातप का
वहॉं न बँधता चंदोवा।
मन धीरे धीरे बहता जाए,
यादों में घुलता जाए।
स्वप्नों की स्वर्णिम पाँखें
मन झूमा झूमा जाए,
अपने को भूला जाए।
धीरे धीरे बहता जाए।
हाइकु
सूरज
चेतना विस्तार
श्रीप्रभु के ...
आ बरसो मेघा
आज रक्षाबन्धन
जन जन का प्या...
अमृत महोत्सव
प्रिय मेरा
ऑंवले का वृक्...
क्यों बार-बार चाँद, छुप जाए बादलों में ! क्यों बार-बार चाँद, छुप जाए बादलों में !
क्यों ना किसी के गम को दूर किया जाए??.... क्यों ना आज से एक नई शुरुआत की जाए?? क्यों ना किसी के गम को दूर किया जाए??.... क्यों ना आज से एक नई शुरुआत की जाए?...
कुदरत की ये अनुपम देन इनके लिए गर्मी में नेक काम करे पंछी के पानी पीने का इंतजाम करे कुदरत की ये अनुपम देन इनके लिए गर्मी में नेक काम करे पंछी के पानी पीने का इंतजाम...
प्रेमी की आंखों में जितना डूबती है उतना बच जाती है प्रेमिका प्रेमी की आंखों में जितना डूबती है उतना बच जाती है प्रेमिका
नशा व गुरूर को छोड़ सबसे नरमी से पेश आते जाएं। नशा व गुरूर को छोड़ सबसे नरमी से पेश आते जाएं।
कैसे भूल जाऊं मिलन का वो हंसी पल, बेशुमार मेरे प्यार में डूबी थी वो हसीना हर पल कैसे भूल जाऊं मिलन का वो हंसी पल, बेशुमार मेरे प्यार में डूबी थी वो हसीना हर...
अनेकता में एकता, सबकी अपनी-अपनी शान हैं। कण कण में हीरो की धरती, ये मेरा हिंदुस्तान है अनेकता में एकता, सबकी अपनी-अपनी शान हैं। कण कण में हीरो की धरती, ये मेरा हिंद...
जब से तुम आए जीवन में खुशियों की सौगात मिली । जब से तुम आए जीवन में खुशियों की सौगात मिली ।
जब रंग इश्क का चढ़े ख्वाहिशें शौकीन हो जाती हैं, जब रंग इश्क का चढ़े ख्वाहिशें शौकीन हो जाती हैं,
कहीं प्रेमसागर बह रहा कहीं बसा कोई मन मंदिर में। कहीं प्रेमसागर बह रहा कहीं बसा कोई मन मंदिर में।
छू लेता हूं तो बर्फ सी पिघलने लगती हो तुम हुस्न के रंगों में गजल कहने लगती हो।। छू लेता हूं तो बर्फ सी पिघलने लगती हो तुम हुस्न के रंगों में गजल कहने लगती ह...
मन में उठे हैं बार बार यहीं सवाल छोड़ थाली गुलाल की लाल मन में उठे हैं बार बार यहीं सवाल छोड़ थाली गुलाल की लाल
जो भी पढ़ता है बस मंत्र मुग्ध सा हो जाता है जो भी पढ़ता है बस मंत्र मुग्ध सा हो जाता है
क्या हो रहा यह कैसा उद्घोष आज होगा जग में कुछ विशेष क्या हो रहा यह कैसा उद्घोष आज होगा जग में कुछ विशेष
गिर-गिर के उठना नाम जिंदगी, क्या करना छोटी-छोटी तकरारो का। गिर-गिर के उठना नाम जिंदगी, क्या करना छोटी-छोटी तकरारो का।
पाखंड का चोला ऐसा है पहन के जो भी निकले, हमारे आस पास के द्वारों पर पाखंड का चोला ऐसा है पहन के जो भी निकले, हमारे आस पास के द्वारों पर
हंसी, ठिठोली, मजाक, एक्शन-रिएक्शन हंसना, खेल-खिलौना बहुत सा पढ़ना हंसी, ठिठोली, मजाक, एक्शन-रिएक्शन हंसना, खेल-खिलौना बहुत सा पढ़ना
लफ़्ज़ बनकर पन्नों पर ये जब तलक छपता नहीं। लफ़्ज़ बनकर पन्नों पर ये जब तलक छपता नहीं।
हर बार कोई ना कोई कहता रहे मे कलाकार हूँ मैं एक कलाकार हूं। हर बार कोई ना कोई कहता रहे मे कलाकार हूँ मैं एक कलाकार हूं।
कभी-कभी हर पल जिंदगी में ऐसे तराशा जाता है। ऐसे तराशा जाता है, ऐसे तराशा जाता है। कभी-कभी हर पल जिंदगी में ऐसे तराशा जाता है। ऐसे तराशा जाता है, ऐसे तराशा जाता...