Chandra prabha Kumar
Fantasy
शीतल छांव
वेत्रवति की
शीतल छाँह तले,
छाया सुखकर
मंद समीर बहे।
सूर्यातप का
वहॉं न बँधता चंदोवा।
मन धीरे धीरे बहता जाए,
यादों में घुलता जाए।
स्वप्नों की स्वर्णिम पाँखें
मन झूमा झूमा जाए,
अपने को भूला जाए।
धीरे धीरे बहता जाए।
हाइकु
सूरज
चेतना विस्तार
श्रीप्रभु के ...
आ बरसो मेघा
आज रक्षाबन्धन
जन जन का प्या...
अमृत महोत्सव
प्रिय मेरा
ऑंवले का वृक्...
मेरी पलकों के आस पास, तेरी ख्वाबों का गूंजा है, मेरी पलकों के आस पास, तेरी ख्वाबों का गूंजा है,
हरित क्रांति लाओ, देश कॊ आगे बढ़ाओ। पर्यावरण कॊ बचाओं, साथी हाथ बढ़ाओ। हरित क्रांति लाओ, देश कॊ आगे बढ़ाओ। पर्यावरण कॊ बचाओं, साथी हाथ बढ़ाओ।
मेरी आहों में छिपे दर्द को महसूस कर जाना फिर ना कहना, कोई तुझे बदनाम कर गया। मेरी आहों में छिपे दर्द को महसूस कर जाना फिर ना कहना, कोई तुझे बदनाम कर गया।
जय बोलो जय बोलो इस युग के ऋषिराज की जय बोलो, जय बोलो। जय बोलो जय बोलो इस युग के ऋषिराज की जय बोलो, जय बोलो।
उस दिन तो मेरे आंखों में आंसू और दिल में अफसोस की झनझनाहट ही होगी। उस दिन तो मेरे आंखों में आंसू और दिल में अफसोस की झनझनाहट ही होगी।
वाक़िफ हूं मै, अपनी जिंदगी की हर हार से । वाक़िफ हूं मै, अपनी जिंदगी की हर हार से ।
सब को कहां मिल पाते हैं जीवन के छुपे खज़ाने ! सब को कहां मिल पाते हैं जीवन के छुपे खज़ाने !
किस कदर बंटता ही चला गया। मैं उन टुकड़ों का हिसाब मांगता हूँ। किस कदर बंटता ही चला गया। मैं उन टुकड़ों का हिसाब मांगता हूँ।
अधिकार है इसको भी स्वाभिमान संरक्षित करने का, अधिकार है इसको भी अस्तित्त्त्व अपना बचा अधिकार है इसको भी स्वाभिमान संरक्षित करने का, अधिकार है इसको भी अस्तित्त्त्व...
दुनिया इसको झुक झुक करती सलाम है देश मेरा बुद्ध है कि देश मेरा राम है। दुनिया इसको झुक झुक करती सलाम है देश मेरा बुद्ध है कि देश मेरा राम है।
उसी लगन में प्यार से प्यार पा जाता है। रब को पाकर, प्यार में रब हो जाता है। उसी लगन में प्यार से प्यार पा जाता है। रब को पाकर, प्यार में रब हो जाता है।
मगर वो ये नहीं जानते जाते-जाते उसका हाथ मेरे ही हाथ में था। मगर वो ये नहीं जानते जाते-जाते उसका हाथ मेरे ही हाथ में था।
नई फसल फिर से उग आई फिर बोलो तुम कब आओगे ? नई फसल फिर से उग आई फिर बोलो तुम कब आओगे ?
नेत्र खोलो देखो मुझे, इस सृष्टि का रचयिता, समय हूँ मैं। नेत्र खोलो देखो मुझे, इस सृष्टि का रचयिता, समय हूँ मैं।
एक गरीब परिवार में पैदा होकर शासन के शिखर पर जाना अविश्वसनीय सा लगता है एक गरीब परिवार में पैदा होकर शासन के शिखर पर जाना अविश्वसनीय सा लगता ह...
सब कुछ अपने पर है, जितना चाहे सोचो , जितना चाहे लिखो, कहीं कोई व्यवधान नहीं। सब कुछ अपने पर है, जितना चाहे सोचो , जितना चाहे लिखो, कहीं कोई व्यवधान...
मैंने इक खेमे के भीतर मिलते देखे साँप छछूंदर मैंने इक खेमे के भीतर मिलते देखे साँप छछूंदर
क्यूँ आये थे यहॉं तुम क्या करना था और कर क्या अब रहे हो, समय क्यों खो रहे हो। क्यूँ आये थे यहॉं तुम क्या करना था और कर क्या अब रहे हो, समय क्यों खो र...
यही संदेश है ओस की बूंदों का इसे जान ले जो वही सुखी इंसान है। यही संदेश है ओस की बूंदों का इसे जान ले जो वही सुखी इंसान है।
उनकी ही तो सोच है, सोचने देते हैं। उनकी ही तो सोच है, सोचने देते हैं।