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Chandra prabha Kumar

Abstract

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Chandra prabha Kumar

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चेतना विस्तार

चेतना विस्तार

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 आत्मा है स्व का अनुभव ,आत्मा ही स्वप्न दृष्टा,

 जागृति में दुनिया दिखे, जागृति आत्मविस्तार। 

 जागृति आत्म विस्तार, कुछ बाहर से न आता,

 समस्त अनुभव मन के हैं, जान यह सुख दुःख तैरे। 

 कहै प्रभा समझाय, आत्मा की शक्ति धीरता,

 वही सत्य तोष भजे, जो लखे चेतन आत्मा।।


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