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Gyaneshwari Vyas

Abstract

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Gyaneshwari Vyas

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शीर्षक: दिल की तरंगे

शीर्षक: दिल की तरंगे

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कभी तार्रुफ ना सुनता है, कभी तबस्सुम सा खिलता है।

यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।


कई राज है गहरे इसमें, फिर भी चुप रहता है।

यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।


कभी किसी की न सुनता, फिर भी ताने सब सहता है।

यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।


कभी सहारे ढूंढने होता आतुर, कभी खुद के दम पर जीता है।

यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।


कभी किस्से कई कहता, कभी गुमसुम सा रहता है।

यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।


किया अपमान अपनों ने, फिर भी कुछ ना कहता है।

यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।


कई धोखे मिले जीवन में, फिर भी इंसानियत को तकता है।

यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।


मुकद्दर पर ना जाने अब भी, क्यों यकीन करता है।

यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।


मानवता की राह पे चलता, अब भी खुशियाँ ही बिखेरता है।

यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।


कभी तार्रुफ ना सुनता है, कभी तबस्सुम सा खिलता है।

यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।


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