शीर्षक: दिल की तरंगे
शीर्षक: दिल की तरंगे
कभी तार्रुफ ना सुनता है, कभी तबस्सुम सा खिलता है।
यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।
कई राज है गहरे इसमें, फिर भी चुप रहता है।
यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।
कभी किसी की न सुनता, फिर भी ताने सब सहता है।
यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।
कभी सहारे ढूंढने होता आतुर, कभी खुद के दम पर जीता है।
यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।
कभी किस्से कई कहता, कभी गुमसुम सा रहता है।
यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।
किया अपमान अपनों ने, फिर भी कुछ ना कहता है।
यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।
कई धोखे मिले जीवन में, फिर भी इंसानियत को तकता है।
यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।
मुकद्दर पर ना जाने अब भी, क्यों यकीन करता है।
यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।
मानवता की राह पे चलता, अब भी खुशियाँ ही बिखेरता है।
यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।
कभी तार्रुफ ना सुनता है, कभी तबस्सुम सा खिलता है।
यह दिल है कैसा मेरा, बार-बार बदलता है।।
