STORYMIRROR

Sonam Kewat

Tragedy Thriller Others

4  

Sonam Kewat

Tragedy Thriller Others

शायद मैं बोझ हूँ

शायद मैं बोझ हूँ

1 min
347

तीस साल की हो चुकी हूं पर 

अब भी मां बाप के घर में रहती हूं 

शादी नहीं हुई है अब तक इसलिए

शायद रिश्तेदारों की आंखों में चुभती हूं 


बेटी को इस तरह इतने दिनों तक 

घर में रखने का कोई रिवाज नहीं है 

पीठ पीछे कहते ही होंगे लोग की 

मां बाप को मेरेे उम्र का लिहाज नहीं है 


रिश्ते तो वो हमेशा देखते हैं मेरे लिए 

पर कोई मेरे मन को भाता नहीं है 

करियर छूटने की चिंता होती है और

दूसरों के सहारे जीना आता नहीं है 


मां-बाप कभी मुझसे कुछ कहते नहीं

पर चिंता तो उन्हें जरूर होती होगी 

मेरी बेटी का घर बस जाए ऐसा तो 

मेरी मां भी हमेशा सोचती होगी 


सपने मुझे रातों में जगा कर कहते हैं 

मैं सपनों की एक नई सोच हूं पर 

समाज में शादी को देख लगता है कि 

मैं अपने मां-बाप पर कोई बोझ हूं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy