Akanksha Gupta (Vedantika)
Tragedy
शहर की अमीरी के आगे
बेबस है गांव की गरीबी
भूख से तड़पते इस पेट को
ललचाते शहरों के पकवान
भरे हुए पेट यह कभी न समझे
भूखे सो रहे कितने परिवार
महलों में रत जगे हो रहे
आंखों में कटी है सारी रात
मेहनत की थकान है इतनी
गहरी नींद सोये कामगार।
मिलन का रंग
मोहब्बत का दा...
ज़िंदगी
ज़िम्मेदारियों...
सौगात
बाकी है
अधूरी रह गई
नसीब में नहीं...
दिल की नज़र से
वीरानियाँ
क्या खेल कोरोना ने खेला है दिल तोड़ दिया अकेला है क्या खेल कोरोना ने खेला है दिल तोड़ दिया अकेला है
ठंडी शीतल छाँव में बैठा करते थे गाँव में ठंडी शीतल छाँव में बैठा करते थे गाँव में
ये सुबह बहुत डराती है, मगर ये काली अंधेरी रात दिल को भाती है। ये सुबह बहुत डराती है, मगर ये काली अंधेरी रात दिल को भाती है।
ना जाने कितना दर्द छुपाकर वो जीती है क्या समझ पाएंगे उसके जिस्म के खरीदार? ना जाने कितना दर्द छुपाकर वो जीती है क्या समझ पाएंगे उसके जिस्म के खरीदार?
सब मिल जाए कभी होता ऐसे। सब मिल जाए कभी होता ऐसे।
जिसे जीने की चाह लिए पैंतीस बरस गुजार दिए जिसे जीने की चाह लिए पैंतीस बरस गुजार दिए
एक था ...निरमिष। जिसने पीया जीवन का अनंत विष।। एक था ...निरमिष। जिसने पीया जीवन का अनंत विष।।
प्यार के नाम कभी कुर्बानियाँ बेगार नहीं होती हैं, प्यार के नाम कभी कुर्बानियाँ बेगार नहीं होती हैं,
अगणित जाने निगल गया , गमगीन विश्व का हर कोना अगणित जाने निगल गया , गमगीन विश्व का हर कोना
दुनिया मानती है जानवर इससे बचा ना कोई इसका पेट नहीं असुर का कुआं है कोई दुनिया मानती है जानवर इससे बचा ना कोई इसका पेट नहीं असुर का कुआं है कोई
बात बे बात पे यों तानाकशी हर बार करते जाना, बात बे बात पे यों तानाकशी हर बार करते जाना,
पेंशन पीट गई राजनीति के भेंट चढ़ गई। राजनीतिज्ञों कि पेेंशन अनगिनत बार शुरू हो गई। पेंशन पीट गई राजनीति के भेंट चढ़ गई। राजनीतिज्ञों कि पेेंशन अनगिनत बार शुरू हो...
एक से दो... दो से चार छूने से बढ़ते है। एक से दो... दो से चार छूने से बढ़ते है।
कि बिना कहे एक दूसरे के मन का हाल जान लेते थे! कि बिना कहे एक दूसरे के मन का हाल जान लेते थे!
दिमाग के हर हिस्से में बसते हैं......सिर्फ और सिर्फ सैंकड़ों छोटे छोटे दिमाग दिमाग के हर हिस्से में बसते हैं......सिर्फ और सिर्फ सैंकड़ों छोटे छोटे दिम...
जब रो-रोकर तकिए गीले हो गए जब आधी रात तक ये मंजर चला जब रो-रोकर तकिए गीले हो गए जब आधी रात तक ये मंजर चला
अभी भी वक्त है सुधर जावो दीवानो भारतवर्ष का भविष्य तुम्हारे हाथ में हैं!! अभी भी वक्त है सुधर जावो दीवानो भारतवर्ष का भविष्य तुम्हारे हाथ में हैं!!
हो न रहा हो मिलन तो निकलती है सिसकी हो न रहा हो मिलन तो निकलती है सिसकी
भरा पूरा परिवार किंतु मैं लाचार , सहारा थी जिनका आज उनके सहारे का मोहताज हो गई। भरा पूरा परिवार किंतु मैं लाचार , सहारा थी जिनका आज उनके सहारे का मोहताज हो ग...
अच्छा तो हैं जनसंख्या घटेगी कोई रोजगार मांगेगा ना रोटी अच्छा तो हैं जनसंख्या घटेगी कोई रोजगार मांगेगा ना रोटी