STORYMIRROR

SUNIL JI GARG

Drama Tragedy Inspirational

4  

SUNIL JI GARG

Drama Tragedy Inspirational

शादी जो टूटी

शादी जो टूटी

1 min
354

काहे उस शादी में गया

सदा रहा मुझको मलाल

दहेज के लिए टूटा रिश्ता

दिल बिलकुल हुआ हलाल


बिलकुल दृश्य था फिल्म जैसा

चिल्लम चिल्ली थी मची हुई

देखा बिल्कुल न जाता था

पगड़ी जमीन में रखी हुई


मन हुआ दूल्हे की करूं पिटाई

आज का युवक और ऐसा लालच

पूरा परिवार बिलकुल गिद्ध सा

मांगे गाड़ी और जमीन के कागज


जल्दी समझ आ गया कि

अच्छा हो अगर शादी न हो

अपने दोस्त की बिटिया की

जीवन की यूं बर्बादी न हो


ऐसी बारात लौट ही जाए अच्छा

बिटिया को बेहतर मिलेगा साथी

ये कहकर मैंने मित्र को समझाया

उसकी पगड़ी उठा वापस बांधी


दो साल बाद वो बिटिया नए साथी संग 

घर मेरे आई है रात्रि के भोज पर

दोस्त भी आया है साथ में इनके

गदगद हूँ नियति के इस संजोग पर



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama