STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Tragedy

4  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Tragedy

सुधर जाओ

सुधर जाओ

1 min
22

जो विद्यार्थी किनारे के आसपास सुधर जाओ

अनुतीर्ण होने के दरिया में डूबने से बच जाओ


जो विद्यार्थी अनुतीर्ण होने के बहुत नजदीक है,

वो ओर ज्यादा सुधकर,अपना भविष्य बचाओ


जो अर्द्धवार्षिक में, उतीर्ण हुए, ज्यादा न इतराओ

गणित विषय पर जरा सा भी रहम तुम न खाओ


करो परिश्रम,न करो किसी बात का गम विद्यार्थियों

शूल जैसे विद्यार्थी जीवन में गुलाब जैसे मुस्कुराओ


आर्यभट्ट वंशज, तुम भारतीय हो,यह न भूल जाओ

अथक परिश्रम से,तुम आसमां के तारे गिन जाओ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama