STORYMIRROR

SUNIL JI GARG

Romance

4  

SUNIL JI GARG

Romance

संगत

संगत

1 min
273

गीतों को मेरे सरगम बना दो 

सरगम बना के सुरों में सजा दो 

सुरों में सजा के मन में बसा दो 

मन में बसा के धड़कन बना दो 


तुम आवाज देकर बुला लो मुझको 

संगत से ही सुन्दरता बनेगी 

ये फूलों की बातें सुन लो बता दो 

गुपचुप इशारे हवा में उड़ा दो 

हवा में उड़ा के ज़रा मुस्करा दो 

ज़रा मुस्कुरा के फसाना बना दो 


तुम नज़रें ज़रा धीरे धीरे उठाना 

यही लय तो सुर में है रंग भरती

यूँ तस्वीर धीरे धीरे बना दो 

होंठों पे सबके ये गीत सजा दो 

हर एक दिल में प्यार की ज्योति जगा दो 

रौशनी से इसकी चेहरे खिला दो 


अभी पूछता हूँ तुमसे क्या मानोगी मेरा

तुम्हारी मर्ज़ी पहले से मुझको पता है 

वैसे कुछ अधरों से अपने बता दो 

मेरे कहे का कुछ तो सिला दो 

मेरे गीतों में नए रंग भर दो 

कशिश में रहूँ मैं ऐसी ही सजा दो। 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance