सारा जहांँ मै भूल रहा हूंँ
सारा जहांँ मै भूल रहा हूंँ
तेरे चले जाने के बाद मै बहुत मायूस बन गया हूंँ,
आज तुझे सामने देखकर मै हैरत में पड गया हूंँ।
तेरी मुलाकात से मै दिल से अति रोमांचित हुआ हूंँ,
तेरे नयनो में मेरी तस्वीर देखकर मै मस्ताना बना हूंँ।
तेरे वापस आने से दिल का मेखाना खोल रहा हूंँ।
मेरे दिल में इश्क का शोर मै महसूस कर रहा हूंँ।
तेरे लिये जो नफरत थी उसे मै आज मिटा रहा हूँ,
मेरे इश्क के समंदर में तुझे मै लहराना चाहता हूंँ।
ये मुरादों की वजीरात मै तुझको पेश कर रहा हूंँ,
तुझे मेरी इश्क की मल्लिका मै बनाना चाहता हूंँ।
मेरी इश्क की तन्हाईयांँ को मै आज जला रहा हूंँ,
"मुरली" तेरी बांहों में सारा जहांँ मै भूल रहा हूंँ।
रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)

