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Ravi Jha

Romance Classics


4.5  

Ravi Jha

Romance Classics


रदीफों काफिया

रदीफों काफिया

1 min 300 1 min 300

एक इम्तिहान में हार से कुछ ऐसा नाराज़ हुआ

कि जीवन में एक नए राह का आगाज़ हुआ।


किसी को बना लिया हमनें इतना अपना कि

हर एक सांस उसके सांस का मोहताज हुआ। 


एक रोज आयी थी छत पर चाँद को देखने 

अरे! उसे देखकर तो महताब भी बेताज हुआ।


टूटे फूटे शब्दों से आज फिर कुछ लिख गया 

लगता है मैं आज फिर खुद से नाराज़ हुआ। 


प्यार बिछड़न तरपन ये सब तो कब का हुआ 

तो ऐसा क्यों लगता है जैसे ये सब आज हुआ ?


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