STORYMIRROR

Ravi Jha

Abstract Romance Fantasy

4  

Ravi Jha

Abstract Romance Fantasy

तुम

तुम

1 min
301

यूँ तो मेरे हर गीत का आगाज़ हो तुम

पर जो अनसुना रहा वो आवाज़ हो तुम।


हर रोज जो आकर नींदों को सजाता है

तुम मानो या मानो मगर वो साज़ हो तुम।


और बताओ! सब ठीक है न तुम्हारे यहाँ

बातें नहीं हुई तुमसे ! क्या नाराज़ हो तुम ?


लोग पूछेंगे 'तुम' किसको लिखे हो 'रवि'

मान गए गुरू ! शायर मिज़ाज हो तुम। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract