STORYMIRROR

Ravi Jha

Romance Classics Thriller

4  

Ravi Jha

Romance Classics Thriller

मोहब्बत

मोहब्बत

1 min
420

बिन किये ही मोहब्बत मजा देती है

करने पर तो ये केवल सजा देती है

हम तो आशिक नहीं जो दिल्लगी करे

इश्क से वाकिफ नहीं! क्या शायरी करें?


बिन मोहब्बत के तुझे था गाया बहुत

इस ज़माने को हमने समझाया बहुत

गाते गाते हुआ इश्क यह बात है सही

ये तुमको भी हुआ तुमने बताया नहीं।


मैं ती गीतों में तुमको ही लिखता रहा

मैं तो ख्वाबों में तुमको ही सोंचता रहा

मेरे सपनों में तुम ही तो आती रही मगर

तुम्हें पास से दूर जाते मैं तो देखता रहा।


हम से तुम हट गयी तो मैं मैं रह गया

दर्द इस बिछड़न का भी मैं सह गया

एक तुम हो कि मेरी कुछ सुनी ही नहीं

एक मैं हूँ जो सब कुछ तुम्हें कह गया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance