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Lakshman Jha

Tragedy


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Lakshman Jha

Tragedy


" राम -राज्य "

" राम -राज्य "

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कितने सपने सँजोये थे ,“ अच्छे दिन “ आ जाएंगे !

हम रामराज्य के झंडे को ,तुंग शिखर पर लहराएंगे !!

भय से जीवन है बना हुआ ,जब राम नहीं शासक मेरे !

है रावण का आधिपत्य यहाँ ,तब भला कहाँ हो कब तेरे !!

भोली जनता दम तोड़ रही , गंगा में लाशें बहतीं हैं !!

श्मशानों में है जगह कहाँ ,लकड़ियाँ भी नहीं मिलतीं हैं !!

अस्पताल नहीं ना है बिस्तर ,दावा नहीं ना सुई का इंतजाम यहाँ ! 

ना वेनटीलेटेर ना ऑक्सीजन है ,तड़प रहे सब लोग यहाँ !!

मंहगायी का हाल ना पूछो ,मध्यम और निम्न तड़पते हैं !

नौकरियां सब की सिकुड़ रहीं हैं ,कुपोषण से बच्चे सब मरते हैं !!

यह कैसा है “ राम- राज्य “,जिसकी जनता पैदल चलती है !

राजा खरीदे पुष्पक- वाहन ,सीता ही अग्नि में जलती है !! 

जो राजा जनता का हो ना सका , उस पर कौन विश्वास करेगा ?

इतिहासों के पन्नों में उसका ,भद्दा काला सा ही रूप बनेगा !!


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