राह में जहाँ खड़े हैं दीवाने
राह में जहाँ खड़े हैं दीवाने
कुछ बात तो है जो पांव ज़मीं पर पड़ते नहीं हैं,
नज़र वहाँ जाती नहीं राह में जहाँ खड़े हैं दीवाने !
उम्मीदों के साये में निकले थे जिनकी तलाश में,
कोई बताए किस मोड़ पर बनकर खड़े हैं बेगाने !
जिद भी थी जुनून भी था फिर भी फिसल हो गए,
उठ कर देखा लबों पर सजाकर नए खड़े हैं तराने !
तकदीर कैसे करवट बदलती है आज़ आंखों ने देखा
ऊंची मीनारों पर धूल फांकने वाले खड़े हैं मस्ताने !
अखबारों में चर्चा है ग़रीबी की रेखा से ऊपर उठा है,
गम को मिटाने वाले मयखानों में लेकर खड़े हैं पैमाने !
ईश्क करने से पहले ईश्क का इम्तिहान लेने लगे हैं,
मोहब्बत की दुकान सजाकर आशिक खड़े हैं सयाने !
मुठ्ठी भर कुछ उम्मीदें लेकर कल गए उनके शहर,
दीवाने की मुफलिसी देख लेकर नए खड़े हैं बहाने !

